Description
6 मुखी रुद्राक्ष (छह मुख वाला रुद्राक्ष) को पहनना मुख्यतः बुद्धि, आत्म-नियंत्रण और कामनाओं पर विजय के लिए लाभकारी माना जाता है। यह रुद्राक्ष कार्तिकेय (भगवान शिव के पुत्र) का प्रतीक है, जो युद्ध और संयम के देवता माने जाते हैं।
🔶 6 मुखी रुद्राक्ष क्यों पहना जाता है?
1. काम, क्रोध और लोभ पर नियंत्रण:
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यह wearer को इंद्रियों पर संयम रखना सिखाता है।
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वासनात्मक विचार, क्रोध, ईर्ष्या और लालच पर नियंत्रण करने में मदद करता है।
2. बुद्धि, विवेक और आत्म-विश्वास में वृद्धि:
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इसे पहनने से एकाग्रता, तर्कशक्ति और स्मरण शक्ति बेहतर होती है।
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विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षा देने वाले या वे लोग जो निर्णय लेने में कमजोर हैं, उनके लिए उपयोगी है।
3. गंभीर सोच और बोलने की कला में सुधार:
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यह गले के चक्र (Throat Chakra / विशुद्ध चक्र) को संतुलित करता है, जिससे स्पष्टता से बोलने और आत्म-अभिव्यक्ति की शक्ति मिलती है।
4. शारीरिक स्वास्थ्य लाभ:
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विशेष रूप से गले, थायरॉइड, आँखों और यौन समस्याओं से संबंधित रोगों में यह लाभकारी माना जाता है।
5. विवाह और पारिवारिक समस्याओं में राहत:
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जिन लोगों को विवाह में बाधा आ रही हो या वैवाहिक जीवन में तनाव हो, उनके लिए यह रुद्राक्ष सहायक हो सकता है।
👤 किसे पहनना चाहिए?
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विद्यार्थी, वक्ता, शिक्षक, कलाकार
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जिनमें आत्म-विश्वास की कमी है
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जो गुस्से, लोभ, या असंयम से परेशान हैं
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वैवाहिक या यौन समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति
📿 पहनने की विधि:
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दिन: मंगलवार या शुक्रवार (स्नान करके, शुद्ध होकर)
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मंत्र:
👉 “ॐ हुं नमः” या
👉 “ॐ स्कन्दाय नमः” – 108 बार जाप करें -
इसे गंगाजल, शहद और दूध से शुद्ध करें, फिर पूजा कर पहनें।
⚠️ महत्वपूर्ण बातें:
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इसे चांदी, तांबे या पंचधातु की माला या लॉकेट में पहन सकते हैं।
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संयमित आहार-विहार रखना उचित होता है।
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गले में या दाहिने हाथ में धारण किया जा सकता है।
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